नई दिल्ली आर्थिक संकट से जूझ रहे रेलवे ने आमदनी बढ़ाने के लिए फिर से डायनेमिक प्राइसिंग पॉलिसी का सहारा लिया है। इस बार डेवलपमेंट सरचार्ज और बिजी सीजन सरचार्ज के नाम पर फिर से माल भाड़े में वृद्धि कर दी गई है। पिछले 18 माह के दौरान यह भाड़े में 14वीं वृद्धि है। सर्वाधिक आठ फीसदी की वृद्धि बिजली घर के कोयले (कोल) और स्टील प्लांट के कोयले (कोक) में हुई है। इसी तरह खाद्यान्न से लेकर आयरन ओर, सीमेंट, लोहा, नमक तक की ढुलाई में छह फीसदी बढ़ोतरी की गई है। हालांकि इससे कंटेनरों की ढुलाई को अलग रखा गया
है। यह फैसला शनिवार से लागू हो गया है। रेलवे बोर्ड की रेट सर्कुलर संख्या 38/2011 के मुताबिक डेवलपमेंट सरचार्ज में तीन फीसदी बढ़ोतरी की गई है। रेलवे ने जून 2007 से सभी तरह के सामान पर दो फीसदी सरचार्ज लगा दिया था जिसे अब बढ़ाकर पांच फीसदी कर दिया गया है। यह बढ़ोतरी नार्मल टैरिफ रेट (एनटीआर) पर देय होगी। इसके दायरे में औद्योगिक वस्तुओं से लेकर घरेलू उपयोग के सामान, खाद्यान्न, फल-सब्जी आदि सभी शामिल हैं। इसी सर्कुलर में बिजी सीजन सरचार्ज भी बढ़ा दिया गया है। रेलवे बोर्ड ने इसी वर्ष एक अप्रैल से कोयला एवं कोक पर पांच फीसदी का बिजी सीजन सरचार्ज लगाया था, जबकि अन्य कमोडिटी पर सात फीसदी का बिजी सीजन सरचार्ज लगाया गया था। इसे बढ़ाकर अब सभी पर 10 फीसदी कर दिया गया है। यानी कोयले पर बिजी सीजन सरचार्ज में पांच फीसदी बढ़ोतरी हुई है, जबकि अन्य सामान पर बिजी सीजन सरचार्ज में तीन फीसदी बढ़ोतरी की गई है।
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