अगले साल 1 अप्रैल से महंगी चीनी और महंगा कपड़ा खरीदने के लिए तैयार रहिए। सभी राज्यों के वित्त मंत्रियों ने आम सहमति से इन दोनों वस्तुओं पर चार या पांच फीसदी वैट (वैल्यू एडेड टैक्स) लगाने का निर्णय लिया है। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) पर राज्यों के वित्त मंत्रियों की अधिकारी प्राप्त समिति (ईसी) की शुक्रवार को यहां हुई बैठक में यह फैसला किया गया। बैठक के दौरान मंत्रियों ने यूरोपीय देशों के भ्रमण के बाद वहां के जीएसटी सिस्टम पर भी चर्चा की। ईसी के अध्यक्ष सुशील कुमार मोदी ने संवाददाताओं से बातचीत में बताया
कि चीनी और कपड़ा पर वैट लगाने के बारे में सभी राज्यों के बीच सहमति बन गई है। अधिकतर राज्यों में वैट की न्यूनतम दर पांच फीसदी है, जबकि कुछ राज्यों में यह चार फीसदी है। इसी के आधार पर 1 अप्रैल 2012 से इन दोनों वस्तुओं पर चार या पांच फीसदी वैट लगेगा। यह पूछे जाने पर कि क्या यह किसी राज्य में नहीं भी लग सकता है, तो उनका कहना था कि अधिकतर राज्यों को विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त रकम जुटाने की आवश्यकता है, इसलिए यह कर लगेगा। जिन्हें राशि की जरूरत नहीं होगी, वह नहीं भी लगा सकता है। सुशील मोदी का कहना था कि केंद्र सरकार पहले से ही तंबाकू, चीनी और कपड़ा पर अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी (एईडी) लगाती रही है। 12वें वित्त आयोग की सिफारिश पर राज्यों को केंद्रीय करों में मिलने वाले हिस्से (डिवोल्यूशन) में एक फीसदी इसके लिए भी जोड़ा जाता था। वर्ष 2006 के बाद से अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी की वसूली बंद कर दी गई है। इसलिए 13वें वित्त आयोग ने एक फीसदी अतिरिक्त डिवोल्यूशन देने की व्यवस्था को खत्म करने की सिफारिश कर दी। इससे राज्यों का राजस्व घट गया है। इसलिए अतिरिक्त राशि का इंतजाम करने के लिए यह निर्णय लिया गया। हालांकि, वैट के दायरे से खादी और हैंडलूम को अलग रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि जीएसटी के वास्ते आईटी प्लेटफॉर्म बनाने के लिए पिछली बैठक में एक स्पेशल परपस व्हीकल (एसपीवी) बनाने का फैसला हुआ था।
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