अमेरिका और यूरोप से मांग में आई कमी को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने निर्यातकों को बड़ी राहत दी है। रिजर्व बैंक ने श्रम प्रधान और छोटे उपक्रमों को निर्यात आधारित कर्ज पर दो फीसदी इंटरेस्ट सब्सिडी देने की घोषणा की है। यह सब्सिडी चालू वित्त वर्ष के लिए होगी। रिजर्व बैंक के इस कदम से हैंडीक्राफ्ट, हैंडलूम और कारपेट उद्योग के साथ छोटे व मझोले उपक्रमों (एसएमई) को फायदा होगा। मंगलवार को रिजर्व बैंक ने जारी निर्देश में सभी बैंकों से कहा है कि वे निर्यात आधारित कर्ज के लिए पात्र निर्यातकों को यह छूट देने की व्यवस्था करें। बैंक निर्यातकों को बेस
रेट के आधार पर ब्याज दरों में छूट दे सकते हैं। इसमें फ्लोर रेट यानी ब्याज की न्यूनतम दर सात फीसदी होगी। रिजर्व बैंक ने यह सुविधा उस स्कीम के तहत जारी रखी है, जिसमें निर्यातकों को रुपया आधारित प्री-शिपमेंट और पोस्ट शिपमेंट एक्सपोर्ट क्रेडिट पर ब्याज दरों में छूट मार्च 2010 तक दी गई थी। नई व्यवस्था के तहत हैंडीक्राफ्ट, हैंडलूम, कारपेट उद्योग और एसएमई को चालू वित्त वर्ष तक के लिए यह सुविधा दी गई है। इसके पहले रिजर्व बैंक ने अगस्त 2010 में निर्यात आधारित कर्ज पर दो फीसदी ब्याज सब्सिडी देने की व्यवस्था की थी। यह सुविधा हैंडीक्रॉफ्ट, हैंडलूम, कारपेट उद्योग और एसएमई के अलावा लेदर और लेदर मैन्यूफैक्चर्स, जूट मैन्यूफैक्चरिंग (फ्लोर कवरिंग भी), इंजीनियरिंग गुड्स और टेक्सटाइल उद्योगों के लिए अप्रैल 2011 से मार्च 2011 तक के लिए थी।
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