नई दिल्ली। एफ 1 और बर्नी एक्लेस्टोन दो ऐसे नाम हैं जो एक-दूसरे के पूरक हैं। एक्लेस्टोन वह शक्स हैं जिन्होंने फॉर्मूला वन को दुनिया के सबसे बड़े बिजनेस स्पोर्ट के तौर पर स्थापित किया है। बर्नी को फॉर्मूला वन को अरबों डॉलर का बिजनेस बनाने का श्रेय दिया जाता है। उन्होंने 1971 में ब्रेबहेम टीम को खरीदा जिसके चलते उन्हें फॉर्मूला वन कंस्ट्रक्टर्स एसोसिएशन में सीट मिल गई। इसके बाद 1978 में वह इसके प्रेसिडेंट बन गए। यहां से फॉर्मूला वन को बर्नी ने बदलना शुरू किया। उन्होंने फॉर्मूला वन की टीमों को इस बात के लिए राजी किया कि वह
फेडरेशन के जरिए सर्किट मालिकों को एक पैकेज के तौर पर मिलें। टीमों को राजी करने के बाद सर्किट मालिकों को एक पैकेज के तौर पर एफ 1 मिलने लगा जिसके बदले उन्हें ट्रैक के साइड की विज्ञापन की जगह देनी पड़ी। यहां से एफ 1 में मोटी रकम आने लगे। कॉरपोरेट स्पांसरशिप की शुरुआत हुई जो करोड़ों डॉलर तक जा पहुंची। इसके बाद एक्लेस्टोन ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और नित नए तरीके खोजते रहे जिससे इस स्पीड के खेल को और बड़ा व्यापार बनाया जा सके। पिछले एक दशक के दौरान एक्लेस्टोन ने फॉर्मूला वन को कई नए देशों में शुरू कराया जिनमें इस बार भारत का भी नाम जुड़ गया है।एक्लेस्टोन ऐसे शख्स हैं जो 80 साल की उम्र में भी एफ1 की पूरी कमान अपने हाथ में रखते हैं। सभी स्पांसरशिप डील वह खु ही करते हैं जिन्हें बेह गोपनीय रखा जाता है।
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