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नई दिल्ली।। सोना और चांदी की कीमतों में रेकॉर्ड तेजी आने के कारण इसके कारोबार में गिरावट आने से कारोबारी परेशान हैं। यही कारण है कि अब उन्होंने सरकार से गुहार लगाई है कि वह तुरंत सोना और चांदी के वायदा कारोबार पर बैन लगाए।
कारोबारियों का कहना है कि देश में सोना और चांदी में उतनी डिमांड नहीं है, जितना की दोनों में कीमतें बढ़ रही हैं। अगर इन धातुओं के वायदा कारोबार पर बैन लग गया
तो इनकी कीमतों में 20 से 25 पर्सेंट की मंदी का दौर शुरू हो सकता है। अब हालात यह है कि कीमतों में तेजी के कारण सोना और चांदी के कारोबार में नेगेटिव असर पड़ रहा है।
वायदा पर स्टडी: दी कूचा महाजनी सर्राफा एसोसिएशन के प्रेजिडेंट तेजराम अग्रवाल के अनुसार, हमने अपने स्तर पर सोना और चांदी में तेजी की स्टडी की। इसमें यह बात खुलकर सामने आई कि सोना और चांदी की कीमतों में तेजी का मुख्य कारण वायदा कारोबार हैं।
अगर सरकार ने वायदा कारोबार पर तुरंत बैन लगाया तो इसके दाम 25 पर्सेंट से नीचे आ सकते हैं। इसके अलावा इन दोनों धातुओं की कीमतों में इतना उतार-चढ़ाव नहीं रहेगा, जितना अब रहता है।
तकनीकी खेल : मार्केट एक्सपर्ट जी. सी. गुप्ता कहना है कि सोना और चांदी के कारोबार पर सीधे तौर पर वायदा कारोबार का प्रभाव पड़ता है। मार्च में ही वायदा कारोबारी अप्रैल और मई के सौदे कर रहे हैं। वे सौदे बढ़े हुए दाम पर कर रहे हैं। इसका मतलब यह समझो कि अप्रैल और मई में अब दाम बढ़ना तय है। यानी सोना और चांदी के कम होने के दरवाजे तो आपने बंद कर दिए हैं। यह तकनीकी खेल चल रहा है, इसको खत्म करना होगा।
चांदी में उफान : वायदा पर बाजार में तेजी के रुख के बीच कारोबारियों द्वारा अपना स्टॉक बढ़ाए जाने के कारण मल्टी कॉमोडिटी एक्सचेंज में गुरुवार को चांदी वायदा 57,500 रुपये प्रति किलो के रेकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया।
सरकार का तर्क : इस मामले में अभी तक सरकार का तर्क यह है कि बाजार में सब कुछ डिमांड और सप्लाई के आधार पर होता है। खाद्य और आपूर्ति मंत्रालय के उच्चाधिकारियों का कहना है कि हमें समय - समय पर इस तरह के ज्ञापन मिलते हैं। इस तरह के नीतिगत फैसले बाजार , डिमांड और सप्लाई से संबंधित सभी तकनीकी पहलुओं को देखते हुए उठाए जाते हैं ।
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