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मुंबई : बाजार नियामक सेबी ने इंडियाबुल्स फाइनेंशियल सर्विसेज, इंडियाइंफोलाइन और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया-केबीसी एसेट मैनेजमेंट को म्यूचुअल फंड कारोबार शुरू करने की इजाजत दे दी है। यह जानकारी मामले के जानकार दो सूत्रों ने दी है। इंडियाबुल्स और इंडिया इंफोलाइन ने क्रमश: साल 2007 और साल 2008 में म्यूचुअल फंड कारोबार शुरू करने के लिए लाइसेंस की अर्जी दी थी। यूनियन बैंक ने साल 2009 में म्यूचुअल फंड कारोबार शुरू करने के लिए सेबी के पास अर्जी भेजी थी।
इंडियाइंफोलाइन के चेयरमैन निर्मल जैन ने कहा, 'हमें म्यूचुअल फंड कारोबार शुरू करने के लिए सेबी की मंजूरी मिल गई है। हम अगले दो महीने में अपने प्रोडक्ट्स लॉन्च कर सकते हैं। हम इंडेक्स और ईटीएफ प्रोडक्ट्स लॉन्च करने के बारे में सोच रहे हैं।' इस समय सेबी के पास म्यूचुअल फंड कारोबार में उतरने की इच्छुक कंपनियों के 23 आवेदन लंबित हैं।
मामले के जानकार सूत्रों के मुताबिक, बाजार नियामक सेबी वित्तीय सेवा देने वाली कंपनियों को लाइसेंस देने को लेकर सहज महसूस नहीं कर रहा है। माना जाता है कि सेबी के पूर्णकालिक निदेशक प्रशांत सरन ने उन कंपनियों को म्यूचुअल फंड कारोबार में उतरने की इजाजत देने पर चिंता जताई है, जो इस कारोबार को लेकर गंभीर नहीं हैं।
घरेलू म्यूचुअल फंड बाजार इस समय 9 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। इस समय म्यूचुअल फंड उद्योग के पास कुल 6.2 लाख करोड़ रुपए का एयूएम यानी एसेट अंडर मैनेजमेंट है। म्यूचुअल फंड कारोबार में उतर रहीं कंपनियों को लगता है कि देश के एसेट मैनेजमेंट उद्योग का पूरा विस्तार अभी तक नहीं हुआ है। उनके हिसाब से देश के जीडीपी में इसका योगदान 10 फीसदी से भी कम है। इसको देखते हुए इस बाजार में कारोबार फैलाने के पूरे मौके हैं।
लेकिन म्यूचुअल फंड बाजार की हालत फिलहाल ठीक नहीं लग रही है। निवेश के दूसरे शॉर्ट टर्म मौकों की तलाश में बड़े निवेशक (एचएनआई) म्यूचुअल फंड से दूर हो रहे हैं। म्यूचुअल फंड बाजार के नए खिलाडि़यों को 2008 के वित्तीय संकट में काफी चोट लगी थी। एंट्री लोड की समाप्ति जैसी नियमन संबंधी दिक्कतें म्यूचुअल फंड कंपनियों के कारोबार में बाधक बन रही हैं। सेबी ने अगस्त 2009 में एंट्री लोड को खत्म कर दिया था। म्यूचुअल फंड कंपनियां निवेशकों से शुरुआत में कुछ चार्ज वसूल करती थीं। यह चार्ज मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन लागत के तौर पर लिया जाता था।
लेकिन इंडियाइंफोलाइन जैसे म्यूचुअल फंड बाजार के नए खिलाडि़यों को लगता है कि म्यूचुअल फंड लंबी अवधि का कारोबार है और 9 फीसदी जीडीपी वृद्धि दर को देखते हुए इसमें अपार संभावनाएं हैं।
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