| पाक, चीन की मांग बढऩे से कपास ज्यादा सस्ती नहीं होगी 01/10/2011 | Administrator Warning: Division by zero in /home/business/public_html/modules/mod_minifrontpage/helper.php on line 369 Warning: Division by zero in /home/business/public_html/modules/mod_minifrontpage/helper.php on line 373 Warning: getimagesize(/home/business/public_html/modules/mod_minifrontpage/images/newspic/kapisa.jpg) [function.getimagesize]: failed to open stream: No such file or directory in /home/business/public_html/modules/mod_minifrontpage/helper.php on line 279 Warning: imagecreatefromjpeg(/home/business/public_html/modules/mod_minifrontpage/images/newspic/kapisa.jpg) [function.imagecreatefromjpeg]: failed to open stream: No such file or directory in /home/business/public_html/modules/mod_minifrontpage/helper.php on line 291 Warning: imagecreatetruecolor() [function.imagecreatetruecolor]: Invalid image dimensions in /home/business/public_html/modules/mod_minifrontpage/helper.php on line 292 Warning: imagedestroy(): supplied argument is not a valid Image resource in /home/business/public_html/modules/mod_minifrontpage/helper.php on line 294 Warning: imagejpeg(): supplied argument is not a valid Image resource in /home/business/public_html/modules/mod_minifrontpage/helper.php on line 296 Warning: imagedestroy(): supplied argument is not a valid Image resource in /home/business/public_html/modules/mod_minifrontpage/helper.php on line 297 पाकिस्तान और चीन की आयात मांग बढऩे से चालू सीजन में बंपर पैदावार के बावजूद क [ ... ] |
ऑटो सेक्टरः खरीदें 25/03/2011 | Administrator ऑटो सेक्टर में इन्वेस्टमेंट नफे का सौदा है या नुकसान का , इस बारे में [ ... ] |
प्री-पेमेंट की लागत कुछ बैंकों जैसे भारतीय स्टेट बैंक, आईसीआईसीआई बैंक आदि ने भी फ्लोटिंग रेट के लिए प्री-पेमेंट पेनाल्टी समाप्त कर दी है। लेकिन अगर आप अपना होम लोन एक कर्जदाता से दूसरे कर्जदाता के पास ट्रांसफर कराना चाहते हैं तो हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां प्री-पेमेंट चार्ज लेने के लिए स्वतंत्र हैं। बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के दायरे में आते हैं और आरबीआई ने अभी तक प्री-पेमेंट पेनाल्टी के संदर्भ में कोई निर्देश जारी नहीं किए हैं इसलिए बैंक पेनाल्टी ले सकते हैं। हालांकि, प्री-पेमेंट पेनाल्टी के ऊपर आरबीआई न भी अपनी नाराजगी जाहिर कर चुका है। होम लोन के मामले में उधार लेने वाले लोन के एक हिस्से के प्री-पेमेंट करने पर भी विचार कर सकते हैं। कर्जदाता आम तौर पर तक कोई पेनाल्टी या शुल्क नहीं लेते जब प्री-पेमेंट की राशि उस साल की शुरुआत में बकाया राशि के 25 प्रतिशत से अधिक नहीं हो। इसलिए, अगर आप लोन के एक हिस्से का प्री-पेमेंट करते हैं जो 25 प्रतिशत की सीमा में होता है तो इस प्रकार आप अपनी मासिक किस्तों का बोझ कम कर सकते हैं। यहां होम लोन की नियम एवं शर्तें महत्वपूर्ण होती हैं जो यह तय करती हैं कि कर्जदाता पेनाल्टी लगा सकता है या नहीं। इसलिए प्री-पेमेंट करने से पहले अपने लोन एग्रीमेंट की शर्तों को अच्छी तरह समझ लें। आयकर में होने वाले लाभ समझें लिक्विडिटी व आपातकालीन जरूरतें लंबे समय का नजरिया रखें निवेश के अन्य उपलब्ध विकल्प
ब्याज दरों में हुई बढ़ोतरी से ईएमआई के बढ़ते बोझ को प्री-पेमेंट से कुछ कम किया जा सकता है। अगर पैसे हैं तो आप लोन के एक हिस्से या पूरे लोन का प्री-पेमेंट कर सकते हैं। हालांकि, प्री-पेमेंट करने से पहले यह समझ लें कि होम लोन सबसे सस्ता लोन है। अगर निवेश के किसी विकल्प पर इसके बराबर रिटर्न मिल रहा हो तो अच्छा है प्री-पेमेंट किया जाए ताकि ईएमआई का बोझ कम हो सके।
पिछले साल होम लोन की ब्याज दरों में लगातार बढ़ोतरी हुई है और जिन लोगों ने कम ब्याज दरों पर होम लोन लिया था उनके लिए मौजूदा मासिक किस्त एक बोझ बन गई है। ब्याज दरों में बढ़ोतरी की वजह से मासिक किस्तों में हुए इजाफे के बोझ को कम करने के लिए कुछ विकल्प उपलब्ध हैं जैसे- आंशिक प्री-पेमेंट और पूर्ण प्री-पेमेंट। लेकिन उधार ले चुके ग्राहक इन विकल्पों को इस्तेमाल में तभी ला सकते हैं जब उनके पास अतिरिक्त पैसे हों। प्री-पेमेंट से पहले इनका नफा-नुकसान भी देखा जाना चाहिए। तो आइए देखते हैं क्या हैं प्री-पेमेंट के नफा और नुकसान
होम लोन की अवधि समाप्त होने से पहले आप जब कभी अपने होम लोन का पुनर्भुगतान करना चाहते हैं तो कर्जदाता आम तौर पर बकाया राशि पर प्री-पेमेंट पेनाल्टी लेता है। हालांकि, प्री-पेमेंट पेनाल्टी विभिन्न कर्जदाता अलग-अलग लेते हैं लेकिन यह सामान्यतया दो प्रतिशत होता है। कुछ कर्जदाता कोई प्री-पेमेंट पेनाल्टी नहीं लेते। हाल ही में नेशनल हाउसिंग बोर्ड ने हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों को निर्देश दिया है कि वह फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन ग्राहकों से प्री-पेमेंट पेनाल्टी नहीं लेंगे।
होम लोन के ब्याज के भुगतान पर आपको आयकर में लाभ होता है इसलिए प्री-पेमेंट किया जाना चाहिए या नहीं और कितनी राशि का यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि आपको आयकर में कितना लाभ हो रहा है। क्योंकि प्री-पेमेंट से आपके यह लाभ घट सकते हैं। अगर प्रॉपर्टी का इस्तेमाल आप कर रहे हैं और सालाना ब्याज का भुगतान 1.5 लाख रुपये से अधिक का किया जा रहा है तो लोन के पुनर्भुगतान से अगर ब्याज का कुल सालाना भुगतान 1.5 लाख रुपये से कम नहीं आता है तो फिर टैक्स के देनदारी पर कोई असर नहीं होगा। हालांकि अगर प्रॉपर्टी किराए पर दी गई है तो कुल ब्याज भुगतान टैक्स डिडक्टेबल होता है, इसलिए प्री-पेमेंट का निर्णय इस मामले में थोड़ा अलग हो सकता है।
होम लोन की राशि के आंशिक या पूर्ण पुनर्भुगतान का निर्णय इस बात पर भी निर्भर करता कि निकट भविष्य के वित्तीय लक्ष्य क्या हैं। आपको होम लोन के प्री-पेमेंट से पहले इमरजेंसी फंड की व्यवस्था भी कर लेनी चाहिए। इसलिए कब और कितनी राशि का प्री-पेमेंट किया जाए यह उपरोक्त मामलों पर भी निर्णय करता है क्योंकि होम लोन अन्य कर्जों की तुलना में अपेक्षाकृत सस्ता होता है। पर्सनल लोन और गोल्ड लोन तो 18-24 प्रतिशत के दायरे में होते हैं। अगर आपको भविष्य में पैसों की जरूरत होती है और आपको पर्सनल लोन लेना पड़ता है तो होम लोन के कम ब्याज का फायदा जाता रहता है।
लंबे समय तक ब्याज दरें एक ही दिशा में नहीं बढ़ती हैं। आम तौर पर ब्याज दरों का एक चक्र होता है जो 5-7 साल तक चलता है। इस अवधि के दौरान शीर्ष से नीचे आती हैं और फिर उनकी उल्टी गति शुरू होती है। चूंकि, होम लोन की अवधि लंबी होती है इसलिए लोन की कुल अवधि के दौरान आपको ब्याज दरों के ऐसे दो या तीन चक्र देखने को मिल सकते हैं। इसलिए, प्री-पेमेंट संबंधी कोई निर्णय लेने से पहले आपको दीर्घावधि के नजरिये से सोचना चाहिए और उसी के अनुसार कदम उठाना चाहिए।
लोन के प्री-पेमेंट के विकल्प पर विचार करने के साथ ही आपको यह भी देखना चाहिए कि आप अपने अतिरिक्त फंड का निवेश और कहां कर सकते हैं जहां आपको बेहतर रिटर्न मिल सके। अगर निवेश के विकल्प पर मिलने वाला रिटर्न होम लोन की ब्याज दरों के बराबर है तो लोन का प्री-पेमेंट करना ज्यादा अच्छा रहेगा। इस प्रकार कई ऐसे कारक हैं जिन पर प्री-पेमेंट का निर्णय लेने से पहले विचार करने की जरूरत होती है। अंतत: निर्णय लेना आपके अपने हाथों में होता है।
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