नई दिल्ली।। 31 मार्च यानी मौजूदा वित्त वर्ष का अंत जैसे-जैसे करीब आ रहा है, साइबर ठग भी ऐक्टिव हो गए हैं। ये टैक्स रिफंड दिलाने के नाम पर आपके खाते का ब्यौरा जान सकते हैं। इसके लिए वे फिशिंग अटैक या फर्जी अलर्ट की मदद लेते हैं। ऐसे में किसी भी अनजान ई-मेल या लिंक को फॉलो करने से पहले सतर्कता बरतें। अपने बैंक खाते का ब्यौरा ऑनलाइन न दें।
मैकेफी लैब्स के टेक्निकल प्रॉडक्ट मैनेजर वीनू थॉमस के मुताबिक, कई लोग इनकम टैक्स रिटर्न ऑनलाइन फाइल करते हैं। ऐसे समय में ही साइबर क्रिमिनल ई-मेल के जरिये फिशिंग अटैक करते हैं। इसके तहत ऐसी वेबसाइट बना दी जाती हैं जो हूबहू सरकारी विभाग वाली साइट लगती है। फिर फर्जी साइट पर व्यक्तिगत जानकारी ले ली जाती है।
एक ई-मेल कई लोगों को मिला है, जिसमें इनकम टैक्स रिफंड उपलब्ध होने की बात कही गई है। एक बार इसे क्लिक करने पर यूजर सीधे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की साइट से मिलती-जुलती किसी साइट तक पहुंच जाता है। वहां पर उनसे एक फॉर्म में पर्सनल फाइनेंशल डिटेल भरने को कहा जाता है। यह डिटेल सीधे साइबर फ्रॉड कर रहे शख्स तक पहुंच जाती है, जो आपके क्रेडिट कार्ड या बैंक अकाउंट से सेकंडों में रकम उड़ा सकता है।
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को 2010-11 के लिए 38 लाख लोगों से ऑनलाइन रिटर्न मिले हैं। साइबर लॉ एक्सपर्ट पवन दुग्गल के मुताबिक, लोगों को यह पता नहीं होता कि इंटरनेट के जरिये उनकी फाइनैंशल डिटेल्स चुराई जा सकती हैं और इसका गलत फायदा उठाया जा सकता है। सरकारी विभागों के कामकाज के तौर-तरीकों की भी जानकारी लोगों को नहीं होती।
जो लोग इसकी जानकारी रखते हैं, उन्हें साइबर क्रिमिनल नई तकनीक से फंसाने की कोशिश करते हैं। ऐसे क्रिमिनलों के पास लोगों के ई-मेल अड्रेस थोक के भाव में होते हैं, क्योंकि लोग अपने ई-मेल अड्रेस का हर कहीं जिक्र कर देते हैं। वे ई-मेल में स्पैम फिल्टर का इस्तेमाल भी नहीं करते हैं।
इनकम टैक्स के एक अधिकारी के मुताबिक, विभाग ग्राहकों को कभी भी टैक्स रिफंड जैसे मसलों पर ई-मेल नहीं भेजता और न ही फाइनेंशल डिटेल ऑनलाइन पूछता है। हम लोगों को टैक्स क्रेडिट स्टेटमेंट ऑनलाइन चेक करते समय अपना यूजर आईडी और पासवर्ड बदलते रहने की सलाह देते हैं।
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