नई दिल्ली।। सरकार आयातित महंगी एलएनजी सस्ते दाम पर बेचने के लिए उसकी भरपाई एलपीजी (रसोई गैस) का दाम बढ़ाकर करने की संभावना तलाश रही है।
एक अंतरमंत्रालयी समिति ने इस बात पर सहमति जताई है कि घरेलू गैस का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों से ज्यादा कीमत वसूली जानी चाहिए ताकि आयातित एलएनजी को कुछ सस्ते में बेचा जा सके।
योजना आयोग की सलाहकार (ऊर्जा) सुनंदा शर्मा के नेतृत्व वाली इस समिति की आज इस मुद्दे पर पहली बैठक हुई। इसमें आयातित महंगी एलएनजी को एलपीजी ग्राहकों से ज्यादा वसूली करके कुछ रियायती दाम पर बेचने के बारे में विचार-विमर्श किया गया।
बैठक से जुड़े एक सूत्र के मुताबिक ऊर्जा मंत्रालय के प्रतिनिधियों को छोड़कर सभी इस मुद्दे पर राजी थे। ऊर्जा मंत्रालय इस मुद्दे पर और ज्यादा विचार-विमर्श के पक्ष में है।
अंतर मंत्रालयी समिति का गठन तब हुआ जब पेट्रोनेट एलएनजी ने आस्ट्रेलिया से घरेलू गैस विक्रेताओं की तुलना में चार गुना ज्यादा दाम पर गैस आयात का अनुबंध कर लिया। पेट्रोनेट एलएनजी देश की सबसे बड़ी एलपीजी आयातक है।
ऑस्ट्रेलिया से अनुबंधित यह गैस 2014 से पेट्रोनेट के कोच्चि टर्मिनल पर पहुंचेगी। यह टर्मिनल फिलहाल निर्माणाधीन है। शिपिंग, सीमा शुल्क और एलएनजी को वापस गैस में परिवर्तित करने सहित गैस का कुल मूल्य कोच्चि बंदरगाह पर 17 डालर प्रति दस लाख ब्रिटिश थर्मल यूनिट पड़ेगा।
घरेलू गैस का दाम 4.2 डालर प्रति दस लाख ब्रिटिश थर्मल यूनिट है। आयातित और घरेलू गैस का मूल्य अंतर ज्यादा है। इसमें किस तरह तालमेल बिठाया जा सकता है, पैनल के सामने यह बड़ी चुनौती है।
अंतरमंत्रालयी पैनल में बिजली, उर्वरक, वित्त और तेल मंत्रालय के प्रतिनिधियों के अलावा पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड के सचिव, गेल इंडिया के अध्यक्ष, पेट्रोनेट सीईओ और ओएनजीसी के निदेशक वित्त शामिल हैं।
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